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बात न बीती

प्रयास राजस्थानी कहानी प्रतियोगिता की दस सर्वश्रेष्ठ कहानियों का संग्रह ''बात न बीती`` है। संग्रह में करज (डॉ. मंगत बादल), बनवारी नै कुण मार्यो (पूर्ण शर्मा 'पूरण`), फ्रैम मांय फिट प्रेम (पेन्टर भोजराज), चुप (छगनलाल व्यास), पावसी अर वापसी (अशोक जोशी 'क्रांत`), काळजै री कोर (रामनिवास शर्मा), खुड़पकी (निर्मोही व्यास), गुड़लो (डॉ. लीला मोदी), रिस्तै री ओळखाण (चांदकौर जोशी) व आपरी जड़ां सोधतो मिनख (पुष्पलता कश्यप) कहानियां शामिल हैं। यहां कहानी 'करज` दी जा रही है।

करज- डॉ. मंगत बादल
रचनाकार परिचय :
डॉ. मंगत बादल राजस्थानी साहित्य रै साथै-साथै हिन्दी साहित्य रो इज जाणो-पिछाणो नांव है। आपरी राजस्थानी मांय 'रेत री पुकार`, 'दसमेस`, 'मीरां` चावी पोथ्यां है। हिन्दी मांय 'मत बांधो आकाश`, 'शब्दों की संसद`, 'इस मौसम में`, 'हम मनके इक हार के`, 'सीता`, 'यह दिल युग है`, 'वतन से दूर`, 'आंदोलन सामग्री के थोक विक्रेता`, 'कैकेयी` आद पोथ्यां आपरी कीरत नै बखाणै।
आपनै कादम्बिनी व्यंग्य कथा प्रतियोगिता संभावना पुरस्कार (कादम्बिनी, मासिक, नयी दिल्ली), सुधीन्द्र पुरस्कार-१९९२ ('इस मौसम में` ऊपरां राजस्थान साहित्य अकादमी, उदयपुर कानी सूं) गौरीशंकर शर्मा साहित्य सम्मान-२००१ (भारतीय साहित्य कला परिषद्, भादरा), सूर्यमल्ल मीसण शिखर पुरस्कार-२००६ ('दसमेस` ऊपरां राजस्थानी भाषा, साहित्य एवं संस्कृति अकादमी, बीकानेर कानी सूं) मिल चुक्या है। इणां सूं अळगो आपरो राजस्थान कैनेडियन एसोशिएशन, कनाडा कानी सूं इज सनमान करीज्यो है।
एम.ए. (हिन्दी), एम.फिल., पीएच.डी. ताणी री भणायी कर्योड़ा डॉ. मंगत बादल आजकालै शहीद भगतसिंह महाविद्यालय, रायसिंहनगर (श्रीगंगानगर) मांय हिन्दी विभागाध्यक्ष है।
अठै छपी थकी कहाणी 'करज` नै प्रयास राजस्थानी कहाणी सनमान-२००७ (प्रयास संस्थान, चूरू) दिरीज्यो है।
ठिकाणो : शास्त्री कॉलोनी, रायसिंहनगर-३३५ ०५१ श्रीगंगानगर
कानाबाती ०१५०७-२२०७१७/ ९४१४९ ८९७०७

''कै रै चकवा बात! कटै ज्यूं रात!! आ` काळी घणी अंधारी रात कियां ई तो कटै!``
''गैली है तूं चकवी! इब कठै है बै बातां अर कठै है बै बात कैवणियां!`` चकवो सिसकारो मार` बोल्यो, ''राई रा भाव तो रातूं ई गया!``
''कांइंर् हुयो बातां अर बातां कैवणियां रै? कठै गया इब बै? अर थे इतरा निसांसूं क्यूं हो?`` चकवी ओजूं सवाल कर्यो।
''गया कठै! है तो अठै ई! पण जद सुणणियां ई कोनी तो कैवणियां कांइंर् करै? अेक जमानो हो बात कैवणियां रो। जद बै बात सरु करता तो 'समो` बांध देंवता। सगळी-सगळी रात अेक ई बात चालती रैंवती। कैयी बर तो दो-दो, तीन-तीन रातां ताणी अेक ई बात चालती। मजाल है सुणणियां री पलकां झपक जावै। बै जद बात कैंवता तो लोग बिचाळै नीं उठ सकता। किणी नै पाणी पीवण कै पेसाब करण नै जावणो होंवतो तो बांनै बात बिचाळै रुकवाणी पड़ती। इतरै मांय बात कैवणियो ई होकै रा दो सुट्टा मार लेंवतो कै पाणी पी लेंवतो। थोड़ी देर पाछै ओजूं बात सरु हो जांवती। बात सुणण वाळा ई कम रसिया कोनी होंवता। बरोबर हुंकारा भर`र, आगै सूं बात रो उथळो देय`र बात कैवणियै नै पूरो सा`रो देंवता। जद ई तो कैबत चाली, ''फौज में नगारो, बात में हुंकारो।`` ''हुंकारां बात मीठी लागै।`` ''हुंकारां बात आगै चालै।`` आद। बात कैवणियां बातां-बातां मांय ग्यान री, लोक री, धरम री घणकरी`क चोखी बातां बता देंवता। इब? इब तो टीवी सामीं गूंगां ज्यूं बैठ्या रैवै अर दीदा फाड़ता रैवै। बेरो नीं अै धारावाहिक कांईंंंंंंंंं कैवणो चावै? कैयी धारावाहिकां रो तो सिर-पग कठै है, ओ ई समझ कोनी आवै! इणां नै देख-देख लोगां री संवेदना मरगी। पाड़ोसियां रै आवणो-जावणो, आपसदारी होळै-होळै छूट्यां जावै। बो ई बखत धारावाहिक रो हुवै अर बो ई बखत आपस मांय मिल-बैठणै रो। लोग पाड़ोसी रै न जाय`र .......।``
''अै धारावाहिक ओ तो कोनी कैवै थे पाड़ोसियां सूं रिस्तो ना राखो कै किणी रै घरां ना जाओ!`` चकवी आगै सूं बात काट`र बोली।
''धारावाहिक तो कोनी कैवै पण बिणां रो असर ओ इज पड़्यो है। पैलां लोग बखत मिलतां ई अेक दूजै रै घरां जांवता। दु:ख-सुख मांय हाथ बटांवता। हथाई करता; पण इब तो रोटी ई टीवी सामीं बैठ`र जीमै। इनै तो किणी रै गोळी लागै! रगत पड़ै! आदमी मरै! अर इनै गबागब रोट ठोक्यां जावै! कठै रैयगी संवेदना! छोटै-छोटै टाबरां नै ई देखल्यो। खेलैगा तो हिंसक खेल! इणां रै दिमाग पर हिंसा रो असर देख्यो जा सकै। बडा होय`र अै कांईंंंंंंंंं बणसी?`` चकवै माथो पकड़ लियो।
''आज कांईंंंंंंंंं होग्यो थारै? म्हैं ई कितरी मूरख ही! थांनैं बात कैवण रो कैय दियो!`` चकवी निराजपणो जतांवती बोली।
''आ` कोयी अेक घर री बात कोनी। घर-घर री कहाणी है। कोठै चढ़-चढ़ देखो, घर-घर ओ ई लेखो! आंख खोल`र तो देख! दुनियां मांय कांईंंंंंंंंं हुवै? बुरो ना मान!`` चकवै समझावण दी।
''आपणै तो टीवी कोनी! फेर आपां नै कांईंंंंंंंंं खतरो है? म्हैं तो आपरै फगत बखत काटणै तांईं बात कैवण रो ........!`` कैंवती-कैंवती चकवी आगै कै`यां बिना चुप होगी।
''म्हैं थांनैं बात ई तो कैवूं। पाड़ोसी-घर रै जद आग लाग जावै तो बिण री लपटां सूं आपणो घर बच कोनी सकै। इण कारण म्हैं जिकी बात कैवूं बा फगत परबीती कोनी घरबीती ई बण सकै। टीवी कांईंंंंंंंंं आयो! घर मांय, गिरस्ती मांय, पाड़ोस मांय, रिस्तेदारी मांय दरारां पड़ण लागगी!``
''आ तो मिनख-मिनख रै समझ री बात है। कोयी किणी बात नै किण नजरियै सूं देखै आ बात हरेक पर अळगी-अळगी लागू हुवै। अेक छुरी सूं कोयी किणी री ज्यान ले लेवै अर डागदर बिण सूं ई किणी री जिनगाणी बचा देवै। इण मांय छुरी रो कांईंंंंंंंंं दोख! आ इज बात टीवी मुजब कै सकां!``
''सगळा थां भांत समझदार कोनी चकवी!``
आप री बडाई सुण`र चकवी कीं राजी हुयी तो चकवै बात आगै बधायी, ''घणकरा लोग जिसो देखै बो करण लाग जावै। इण धारावाहिकां रो आछो-बुरो नतीजो तो कद निकळसी पण देखणियां जिकां री समझ छोटी है खराब बातां पर अमल बेगी कर लेवै!``
थोड़ी देर मून रैय`र चकवै फेर आगै बात बधायी, ''सीता रो हड़णो अर रावण रो मरणो अेक ई सिक्कै रा दोनूं पासा है। मिनख नै बुरा दिन बूझ`र कोनी आवै। माड़ा दिन हुवै जद अक्कल भूत-भूंवाळी खा जावै। 'विनाश काले विपरीत बुद्धि` नीं तो राम किसा जाणै कोनी हा कै सोनै रा मिरगला कोनी हुवै। हूणी जद मिनख रै सिर पर चक्कर काटै तो सोचण कोनी देवै। चकवी! दुनियां मांय जात तो फगत दो है, अेक अमीर! दूजी गरीब! अर लड़ाई री जड़ा है- जर, जोरु, जमीन! इण दुनियां ........``
''रैवणद्यो! म्हैं इब बात कोनी सुणणी चावूं! आखती होगी थारा उपदेस सुण-सुण! कांईंंंंंंंंं हुयो आज थारै? सीधी बात करो ई कोनी! भांग पीय`र आया हो कांइंर्? बात नै बस रबड़ दांईं खींचां ई जावो!`` कैय`र चकवी पीठ मोड़ली।
''म्हैं तो थांनैं पैली कैयो, बात सुणणो इतरो सो`रो काम कोनी। हुंकारा भर`र बात रो उथळो देवणो घणो ओखो है। बात री जद ताणी भूमिका नीं बांधी जावै तो बात कैवणै अर सुणणै रो कांईंंंंंंंंं फायदो? क्यूं कै बात सूं बात निकळै अर बात जद निकळ जावै तो दूर-दूर ताणी जावै। गरीब अर अमीर जद सूं दुनियां बणी है चाल्या आवै। अमीर पइसै सूं पइसो कमावै अर घणो अमीर हो जावै। गरीब घणो गरीब हो जावै। दोनूं अेक-दूजै सूं डरै। इण कारण अमीर कदे गरीबी हटावणै रो नाटक करै तो कदे गरीब री सहायता रो!``
''अमीर जद गरीब नै धन देय`र सहायता करै तो ओ नाटक कीकर हो सकै? म्हारै तो थारी आ बात समझ मांय कोनी आयी!`` चकवी उथळो देय`र बूझ्यो।
''थारै समझ मांय आ ई कोनी सकै। अै सगळी सियासत री बातां है। अेक है वर्ल्ड बैंक! बिण रो अध्यक्ष अमरीका! अमरीका भारत नै कैवै, 'आप गरीबांनै अमीर बणावो। अणपढ़ां नै भणावो! म्हैं थांनैं करजो देसूं। थे गरीबांनै करजो द्यो। इण भांत गरीब लोग अमीर बण जावैला` ........।``
''करजो लेय`र ई आज ताणी कोयी अमीर बण्यो है? अणहोवणी बात है।``
''थे ठीक कैयो चकवी! पण भारत धड़ाधड़ करज लियां जावै अर आगै गरीबांनै करजो देवै। इब जद अमरीका भारत नै करजो देवै तो बिण रो ठरको तो चाल ई सी!``
''किण भांत?`` चकवी बोली, ''ओ कांईंंंंंंंंं देस रै अंदरूनी मामलां मांय दखल कोनी?``
'' कुण बूझै? अमरीका तो बाणियो है! बिणज करै! बो दुनियां मांय आप खातर बजार ढूंढ़ै! अेक अरब सूं बेसी लोगां रो देस भारत। ओ देस जद अमरीका रो बजार बण जावैलो तो बिण नै और कांईंंंंंंंंं चायजै? पांचूं आंगळ्यां घी मांय अर सिर कड़ाही मांय! समझी?``
''हां, समझगी! बोहरो जियां किरसै नै करजो देय`र ब्याज, पड़ ब्याज कमावै अर पइसो नीं मुड़ै तद घर, खेत, पसु नीलाम करवाद्यै!`` उथळो दियो चकवी।
''हां थारै बात समझ मांय तो आवै। बिणज रा सिद्धान्त तो कमोबेस अेक सिरखा ई हुवै कै नफो कीकर कमायो जावै। अमरीका अर भारत सिरकार आपस मांय कैयी समझौता कर्या। अमरीका नुंवीं तकनीक देवण रा, खेतीबाड़ी रा नुंवां तरीका, नुंवां बीज अर तकनीक देवण रा समझौता कर्या बदळै भारत मंडी बणसी।``
''भारत सिरकार मानगी कांईंंंंंंंंंं?`` चकवी इचरच सूं बूझ्यो।
''मानगी कांईंंंंंंंंंं पलक-पांवडा बिछा दिया! बहुरास्ट्रीय कंपनियां देस मांय आय`र बिणज सरु कर दियो।``
''फेर आगै?`` चकवी आपरी जिग्यासा राखी।
''आगै कांईंंंंंंंंंं? आ तो कहाणी री भूमिका ही। चकवीजी! थे पैलां ई आखता होयगा, कहाणी तो इब सरु हुवैली!``
''कांईंंंंंंंंंं कैयो?``
''हां! असली कहाणी तो इबै ई सरु होसी!``
''...............``
''बियां तो गांवां सिरखो गांव है खारियो, पण पाड़ोसी गांवां सूं अेक बात मांय सिरै है। इण गांव रै चौधरी रामकरण रै मोभी बेटै रै ब्याव मांय कार, रंगीन टेलीविजन, फ्रीज मिल्या। लोग देखण नै आंवता इण कांच रै डब्बै नै। रामकरण चौधरी रै घर री निसानी चौबारै पर लागेड़ो बीस फुट ऊंचो अैंटीनो हो। लोग अैंटीनो दिखा`र चौधरी रो घर बता देंवता। तनै तो दायजै मांय फ्रीज अर टीवी री सुण`र हांसी आवै पण जद अै चीजां जरूरत री कम अर दिखावै री घणी ही। अै कैयी साल पुराणी बात है। आज तो अै चीजां रंडी घर मंडी है पण बिण जमानै मांय इसी बात कोनी ही। कदे-कदास टीवी रै पड़दै पर कोयी तस्वीर दीख जांवती तो घराळा न्ह्याल हो जांवता। जद दस-दस कोसां पर अै माइक्रोवेव टॉवर कोनी हा। फगत चौधरी रै घरां टेलीफोन हो। आज तो घर-घर मांय लागर्या है। लोग मोबाइल जेब मांय लियां फिरै। बां दिनां टेलीफोन स्यान री बात ही।``
''बै दिन तो बै ई हा चकवी! गांवां मांय खेल-तमासा होंवता। घोळ (कुस्ती), कबड्डी होंवती। लोग मिल`र बैठ्या करता। किणी रै घरां 'जम्मो` है तो किणी रै 'फड़` बांचीजै। इण बहानै लोग भेळा हो जांवता। अेक-दूजै रै घरां हेत सूं जांवता। म्हैं खुद निहाल दे-सुलतान, रूप-बसंत, भगत पूरणमल, जानी चोर रा ख्याल देख्या है। आपणै गांव मांय जद ख्याल होंवता तो आठ-दस गांवां रा लोग अठै भेळा हो जांवता। मेळ-मुलाकात ई चालती रैंवती। म्हैरी (नारी भेख मांय पुरख) नाचती-नाचती कोनी थकती। गायक पूरी रात गांवता पण बेसुरा कोनी होंवता। लोगां नै ई सुर-ताळ री समझ ही। होळियां नै सांग रचांवता। नकल उतारता। लोग बुरो ई कोनी मानता। हांस-हांस दोलड़ा हो जांवता। अैड़ा गुणी कलाकार गांवां मांय रैंवता। इब कांईंंंंंंंंं है? दिन छिप्यो अर आप-आपरी घूरी मांय बड़ जावै कै सूमड़ां दांईं टीवी सामीं जा बिराजै।``
''थे तो कहाणी कैवो नीं। बिचाळै-बिचाळै भटक`र इनै-बिनै क्यूं भाजो? बो जमानो बो हो। बिणां लोगां साथै गयो। आपां तो वर्तमान मांय हां। दुनियां तरक्की करै। आगीनै बधै। थारी भांत सगळा बोदै अर जूनै विचारां रा हुवै तो पड़गी पार! बस!`` चकवी जोस मांय आय`र बोली।
''अरै बावळी! म्हैं कहाणी ई तो कैवूं मोठ तो कोनी उपाड़ूं! होयी-होयी सांच-सांच तो हाड बीती हुवै। कहाणी थोड़ी ई हुवै। कहाणी कैवणै मांय तो कीं तड़को लगाणो ई पड़ै। इणी खारियै गांव मांय रैंवतो हो गुमानो। गुमानै कनै तीस बीघा जमीन ही। दो छोरा। बडो दिनेस, छोटो राजेस। दो छोरियां कांता अर गुड्डी। दोनूं छोरां सूं छोटी। मां-बाप। भर्यो-पूरो कुणबो हो। बियां तो जाति-बिरादरी रै हिसाब सूं गुमानै अर रामकरण मांय भाईपो हो पण कठै राजा भोज अर कठै गंगू तेली! कठै राम-राम, कठै पट-पट! पण इण मांय कांईंंंंंंंंंं है? समाज मांय छोटा-मोटा तो होया ई करै। आप-आप रै करमां रो फळ है। करणी आपो-आप, कुण बेटो कुण बाप!``
अेक दिन दिनूगै-दिनूगै गुमान नै त्यार होंवतां देख बिण रै बाप बूझ्यो, ''गुमाना! सिधसारु। मंडी जावै कै कठै ई गांवतरै?``
गुमानै नै ओ इज डर लागै हो कै बाबो कीं बूझ नी ल्यै पण इब तो बतावणो ई पड़सी। बोल्यो, ''आज कींकर खेड़ै मांय 'लोन मेळो` है। बडा-बडा अफसर आवैला। 'लोन` मंजूर करैला। बठै ई जावूं।``
''ओ लोन मेळो कांईंंंंंंंंंं हुवै?`` बाबै ओजूं सवाल कर्यो।
''बडा-बडा सिरकारी अफसर अर बैंक अफसर गांव मांय पधारैला अर बठै री बठै जरूरतमंदां ने बैंक कानी सूं करजो देवैला।``
''अछ्या! अछ्या!`` बाबो सिर हला`र बोल्यो, ''पण थारो बठै कांईंंंंंंंंं काम? किसो करजो लेवणो है?``
''हां! म्हैं ई सोचूं टेक्टर लेल्यूं! इब ऊंट सूं इतरी खेती कोनी हुवै।`` गुमान उथळो दियो।
''हूं %%% ....!`` बाबै लाम्बो हुंकारो भर्यो, ''पण बेटा करजो तो छेकड़ करजो ई हुवै। कैयो ई है- 'करजो भलो न बाप रो ....` कोयी कैबत इंयां ई थोड़ी चालै! सोड़ सारु पग पसारस्यो तो ठीक रैयसो। सिर रो बोझ तो पगां पर ई आसी। बेटा! करज तो पिवणो सांप हुवै जिको मिनख री छाती पर बैठ`र बिण री सांसां नै पी जावै। रग-रग मांय ज्हैर भर देवै। म्हारै हिसाब सूं तो अेकर काम चलावो। दो-च्यार सालां मांय जद कीं हाथ फुर जावै तो टेक्टर ले लेई। थांनैं बरजै कुण है?``
''थांनैं बेरो कोनी बाबा! इब टेक्टर लेवणियां नै सिरकार अनुदान देवै।``
''बो कांईंंंंंंंं हुवै?``
''इण अेक म्हीनै मांय जिका लोग टेक्टर लेवैला, सिरकार बिणां रा पच्चीस हजार रिपिया माफ करैली। इसो मौको रोज-रोज तो आवै कोनी।``
''लालच ठीक कोनी बेटा! कदे हाथी रिपियै मांय ई मूं`गो हुवै तो कदे लाख रिपियां मांय ई सस्तो। आभै मांय बादळ देख`र घड़ा कोनी फोड़्या करै!``
''थे कुणसै जमानै री बातां करो बाबा! आज तो बडा-बडा देस, सेठ-साहूकार, जमींदार, सिरकार सूं करज लेवै अर धन सूं धन कमावै। आपणै चौधरी रामकरण ई बैंक सूं करज ले राख्यो है।``
''अै मोटै लोगां री मोटी बातां है। मोटै घरां रा मोटा बारणां। बिणां री नकल ठीक कोनी! हां, अेक बात बता! बैंक कांईंंंंंंंं सिरतां पर करजो देवै?``
''सरत कांईंंंंंंंंं है? बस जमीन रा कागद आप कनै राखै!``
''वा` रे %% बावळा बेटा! जद आपणै कनै कागद ई नीं होसी तो आपां जमीन मांय के मांगां। जमीन तो बैंक री हो जावैली।``
''इंयां कीकर बैंक री हो जावैली। अंधेर है कांईंंंंंंंं?`` गुमान तैस मांय बोल्यो।
''भैंस बिण री हुवै जिकै रै हाथ मांय लाठी हुवै, बियां ई जमीन बिण री जिकै कनै जमीन रा कागद। जमीन अडाणै धर करजो लेवणो कठै तांईं ठीक है? कीं तो हियै मांय कांगसी फेर!``
''बैंक जद इतरो बडो करजो देवै तो जमानत तो लेवैलो ई। फेर जमीन रा कागद ई तो आप कनै राखै, जमीन तो आपणै कनै ई रैवैली।``
''बेटा! जमीन तो मां हुवै, जिण नै बेचणो कै अडाणै धरणो गुनाह हुवै। जमीन किरसै नै कैवै, तूं म्हनैंं नां बेची खुद चायै बिक जायी। म्हैं छुडा लेसूं पण म्हनैंंं बेच दी तो तूं कोनी छुटा सकैला।`` बाबै फेरूं समझावण दी।
बै दिन देस मांय सूचना-क्रांति रा हा। प्रधानमंत्री कै कोयी मंत्री रोज किणी स्हैर मांय दूरदरसण रिले केन्द्र रो उद्घाटण कर्या करता। कस्बा, गांव अर ढाणियां ताणी टेलीफोन केबल बिछगी। घर-घर मांय फोन री घंटी बाजण लागगी। मोबाइल आग्या। रंगीन टीवी ई घर-घर मांय आग्या। लोगां नै चायै करजो लेवणो पड़ै पण अै साधन राखणा जरूरी होग्या। भांत-भांत रा कार्यक्रम जिका रो आनंद फगत स्हैरां रा लोग उठाया करता इब ढाणी कै गांव रा लोग ई बचता कोनी रैया। हेमा मालणी, माधुरी दीक्षित, मल्लिका शेरावत, अमिताभ बच्चन रा नांव लोगां री जुबान पर चढ़ग्या। 'क्रिकेट` जिको कदे रईस लोगां रो खेल हो इब हरेक गांव री गळियां मांय पूगग्यो। छोटा-छोटा टाबर ब्रायन लारा, शेन वार्ने, सचिन तेंदुलकर, सहवाग, धोनी नै देखतां ई इंयां पिछाण लेवै जियां गळी रो भायलो हुवै। लुगायां सौन्दर्य प्रसाधनां मुजब आछी तरियां समझणै लागगी। साबण, तेल, क्रीम, पाउडर बेचणियां घरां री बैठकां अर सोवणाळै कमरां ताणी पूगग्या। अंतरराष्ट्रीय फैसन परेड घरां रै आंगणां मांय देखीजण लागगी। गांवां मांय ई 'ब्यूटी पार्लर` बणग्या। छोटै-छोटै गांवां मांय दारू रा ठेका खुलग्या, जिण सूं लोगां री आवणै-जावणै री अबखायी मिटगी। देस रै वैग्यानिकां अंतरिख मांय भारत रो सैटेलाइट छोड`र उन्नत देसां री बरोबरी करली। इण बातां सूं बडै लोगां रै फरक चायै नीं पड़्यो हुवै पण गांव अर कस्बां रै टाबरां अर जुवानां रो सामान्य-ग्यान बधग्यो। तंेदुलकर 'वन डे` मांय कितरा रन अर शतक बण लिया, शेन वार्ने अर मुरलीधरन कितरा-कितरा विकेट ले लिया, किण नै टीम मांय लेवणो चायजै, कुण कप्तान होवणो चायजै, अै बातां नान्हां-नान्हां टाबर बतावण लागग्या। गांव खारियै मांय नुंवीं सूचना-क्रांति आगी।
इब तूं कैवैली म्हैं फेर बहकग्यो। कठै तो बात चालै ही गुमानै रै करज सूं टेक्टर लेवणै री अर कठै बिचाळै सूचना-क्रांति अर क्रिकेट नै ले आयो। इण रो ई कोयी मतलब है चकवी! म्हैं फालतू थूक कोनी बिलोवूं। अै सगळी बातां जे म्हैं थांनैं नीं बतावूं तो थांनैं कांईंंंंंंंं बेरो लागसी कै दुनियां-ज्हान मांय कांईंंंंंंंं-कांईंंंंंंंं चालै! तूं तो कूवै री मींडकी है। बात मोटी आ है कै लारलै पांच-सात दिनां सूं गुमानै रै घर मांय तणाव चालै। बिण रो अेक कारण तो अेक धारावाहिक ई है। 'सासू-बहू` नै लेय`र अेक धारावाहिक चालै जिण नै देखण तांईं गुमानै री जोड़ायत अर मां दोनूं पाड़ोसी भोमै रै घरां दोपारां जाया करती। अेक दिन भोमै री जोड़ायत रो सिर दूखै हो। बिण ना तो टीवी चलायो अर ना इण दोनुवां सूं ठीकठाक बात करी। बस इब तो ठणगी! ल्यावां तो घर मांय रंगीन टीवी ल्यावां। गुमानै आपरी जोड़ायत नै समझावणै री घणी कोसिस करी पण बिणां रो तिरिया हठ जाग चुक्यो हो। गुमानै रो छोटियो बेटो राजेस ई रंगीन टीवी ल्यावणै रै पख मांय हो। बो क्रिकेट रो खिलाड़ी अर दीवानो है। जद ई क्रिकेट रो कोयी अंतरराष्ट्रीय मैच हुवै बो रात-दिन भायलां रै घरै बैठ`र क्रिकेट देखै। भूख, तिस, नींद, ओढ़णो-पै`रणो सो-कीं भूल जावै। बो ई कैवै, ''बाबा! अेक ल्या`र पटकद्यो। आठ-दस हजार री बात है। कांईंंंंंंंंं धन लागै? म्हानै घर-घर भटकणो तो नीं पड़ैलो। जमानै रै साथै चालणै मांय फायदो है।`` मोभी दिनेस मोटर-सायकल लेवणो चावै। बिण रा सगळा साथी मोटर-सायकल पर कॉलिज जावै। बिण नै बसां मांय जांवतां सरम आवै। बो ई तण्यो-तण्यो-सो रैवै। करजो लेवणो गुमानो ई ठीक कोनी समझै पण जमानै साथै चाल`र हारी नै आक चाबणो ई पड़सी। इण कारण बो टेक्टर साथै घरेलू सामान खरीदणै तांईं अेकै साथै ई करज लेय`र सगळा कांटा काढ़णा चावै। करजै रो कांईंंंंंंंंं है होळै-होळै उतर जावैलो!
गुमानो बियां तो सगळा काम बाप नै बूझ`र ई करतो। किणी रै ब्याव, भात, उढ़ावणी मांय कांईंंंंंंंंं लेवणो-देवणो करणो है, बाप री सलाह मुजब करतो। बाप-बेटै रा कदे आपस मांय सींग कोनी अड़्या। आज ई गुमानो सोचै हो बैंक रा कागद त्यार करवायां पाछै बाबै नै बता देसूं! पण कुलड़ियै मांय गुड़ थोड़ो ई फूटै। जिकी बात रो डर हो बा होगी। पै`लै गासियै मांय ई माखी आगी। पड़ सूं डरतो पाडियै पर चढ़्यो पण पाडियै पड़ माथै ई ल्या पटक्यो। बाबै नै राजी करणो ई पड़सी। करजै बिना टेक्टर कोनी लियो जा सकै अर टेक्टर बिना पार कोनी पड़ै! बो खेती मांय पिछड़्यो जावै। ऊंट सूं इतरी खेती हुवै कोनी। मजूरी ई कितरी बधगी अर ऊपर सूं मजदूरां रा नखरा और! अणबणी रो कांईंंंंंंंं मोल हुवै! टेक्टर तो लेवणो ई पड़ैलो! टेक्टर हुवै तो दस घण्टां रो काम घण्टा दो घण्टां मांय नक्की। पइसा तो लागै पण बखत री कितरी बचत है। सुख ई है, काया नै फालतू तावड़ियै मांय कोनी बाळणी पड़ै। मोटर-सायकल, टीवी, फ्रीज इण सगळां रो चाळीस-पचास हजार और खरचो है। जठै टेक्टर रो करजो भर्यो जावैलो अै चाळीस-पचास हजार ई चुक जासी। गाडै मांय छाजलै रो कांईंंंंंंंंं भार?
बाप-बेटै बिचाळै मून अजगर दांईं पसरयो पड़्यो हो। बाप सोचै हो नुंवांे जमानो है। छोरो जियां करै ठीक है। आज दस-दस बीघा जमीन रा मालक करजै सूं टेक्टर ले राख्या है तो ओ कियां लारै रैवै? पण करज तो करज हुवै! अेक ई किस्त नीं भरीजै तो ऊपर सूं जुरमानो ई भरणो पड़ै। बिण सिरकार रो करजो नीं भरणियां री इज्जत तार-तार होंवती देखी है। इण कारण बिण काठमीठ कर`र आपरो काम चला लियो पण लोगां री भांत कदे करजो लेवणै री कोनी तेवड़ी। मिनख तो चावै म्हैं करजो चुकाद्यूं पण किस्मत साथ नीं देवै तो? खेती तो खेती है। कदे काळ पड़ज्या तो कदे ओळा! किरसै रै तो फसल घरां आ जावै जद ई ज्यान मांय ज्यान आवै। पण अै सगळी बातां गुमानो कांईंंंंंंंंं जाणै कोनी? म्हनैंंं इण रै कामां मांय टांग नीं अड़ाणी चायजै। म्हनैंंं दोनूं बखत आछी रोटी मिलै। टाबर सेवा करै। और कांईंंंंंंंंं चायजै म्हनैंं! मून नै अेक कानी सरकांवतां बोल्या, ''देख बेटा! तूं टाबर-टीकरांळो है। दुनियांदारी जाणै। जिको ई काम करो सोच-समझ`र करो। लोगां री देखा-देखी ना करो। घणकरा`क लोग देखा-देखी मांय पइसो अर बखत दोनूं बरबाद करै। दस बीघा जमीन रो मालक खेती सूं किस्त कोनी भर सकै पण फेर ई लोग टेक्टर लेवै। गांव मांय टेक्टर रो इतरो काम कोनी। फेर किस्तां चुकावणै तांईं जमीन कुड़क हो जावै!``
''थे कैवो तो कोनी ल्यूं पण टेक्टर हुयां पछै म्हैं पांच-दस बीघा जमीन हिस्सै-ठेकै ले लेसूं। दो-च्यार बरस मांय टेक्टर खुद रो हो जावैलो।``
''म्हारो तो इतरो ई कैवणो है कै करजो लेवण सूं पैली बिण रै चुकतो करणै री जुगत बिठा लेवणी चायजै जद ई बखत पर करजो चुकायो जा सकै। नीं तो कैवणियां तो इंयां ई क- कमा`र खायो, उधार लेय`र चुकायो तो बेकार जगत मांय आयो।``
''नईं बाबा! इसी बात कोनी! आपां नै तो पाई-पाई चुकाणी है। थे जाणो, इब आगै-आगै खरचो तो बधणो है। इण कारण पाणी आवणै सूं पैली पाळ बांधणी जरूरी है।``
''चकवी जागै है कै सोयगी?`` चुप बैठी चकवी कानी देख`र चकवो बोल्यो, ''म्हारी बात पल्लै पड़ी कांईंंंंंंंंं?``
''समझण नै थे कांईंंंंंंंंं फारसी बोली है? म्हैं तो इतरो ई जांणणो चावूं कै गुमानो करजो लेसी कै कोनी?`` चकवी उथळो देय`र बूझ्यो।
''हां! बात तो तूं ध्यान सूं सुणी है। बूढ़ै बाप तो सगळी ऊंच-नीच समझाय`र आपरो फरज पूरो कर दियो। आगै बात रैयी करजो मिलणै री; तो भूवा जावूं-जावूं करै ही, फूंफोसा लेवण आग्या। बैंक नै तो ऊपरी आदेस मुजब करज देवण रा 'टारगेट` पूरा करणा हा अर किरसां नै करजो लेवणो हो। करजो लेवणियां मांय उछाव ई हो। लारलै कीं सालां सूं लोगां मांय अेक विच्यारधारा ऊभरी है कै आछो खावो-पीवो। करज लेय`र ई सौख पूरा करो। भरीजै करज तो ठीक नीं भरीजै तो ठीक! इण कारण खांवतै-पींवतै घरां रा लोग करज लियां बैठ्या है। बैंकां रा अरबूं-खरबूं रिपिया डूबत खातै मांय पड़्या है। सख्ती करै तो परजातंतर है 'राजनीतिक स्टंट` बण जावै। फेर ई ऊपर सूं आदेस हुवै करज देवण रा टारगेट पूरा करण रा तो बैंक जमीन, घर, दुकान अडाणै राख करजो दे देवै।``
आज अठै लोन मेळै मांय बैंक रा अफसर, किरसा, टेक्टर कंपनियां, डीलर अर दो-च्यार दलाल ई आयेड़ा है। दलालां नै देख`र लागै, दाळ मांय कीं काळो है। ओ तो म्हनैंं पछै बेरो लाग्यो कै टेक्टर लेवणियै हर अेक किरसै सूं पांच-पांच हजार रिपिया लिया गया। जिण मांय दलालां अर अफसरां रो हिस्सो हो। किरसां सोच्यो कै आड़तियै रै दो रिपिया सैंकड़ा ब्याज सूं तो फेर ई सस्ता रैयग्या। पच्चीस री बजाय बीस हजार रिपिया अनुदान कांईंंंंंंंंं कम है? अफसर सोचै घरां बैठ्यां लिछमी आवै तो सुवागत करणो चायजै। बैंक रो टारगेट ई पूरो होग्यो। अेक पंथ दो काज। सगळा ई राजी। डीलर अर टेक्टर कंपनी वाळा ई अेक साथै दस-बा`रा टेक्टर बिकणै कारण राजी हा। बिणां ई अफसरां नै राजी कर दिया जिण सूं आगै चाल`र अैड़ा रिस्ता घणां मजबूत हुवै। जिकै काम मांय सगळा राजी हुवै बठै भ्रस्टाचार हुयो है ओ कुण कै सकै?
टीवी अर फ्रीज घर मांय आग्या। केबल कनेक्सन ई ले लियो। इब गुमान री मां अर जोड़ायत रो पाड़ोसियां रै घरां जावणो छूटग्यो। मां नै जद ई बूढ़ी-ठेरी लुगायां मांय बैठण रो बखत मिलै तो टीवी री बातां बतावै। जद अन्तरराष्ट्रीय क्रिकेट मैच हुवै तो राजेस टीवी सामी जम्यो रैवै। सासू-बहू दोनुवां नै झूंझळ आवै। गुमान री मां तो कै ई देवै, ''मरज्याणां आं टीवी वाळा ओ कांईंंंंंंंंं खटखटो चला राख्यो है। टींगर सगळै दिन थापी लियां खट-खट करबो करै। टींगर सगळै दिन टीवी सामी बैठ्यो रैवै। बिणां री रीस किणी भांत मूंडै पर आ ई जावै। महाभारत, ओम नम: शिवाय धारावाहिक सगळा घरवाळा देखै। दोनूं छोरियां मौको मिलतां ई टीवी आगै आ बिराजै। चित्रहार, रंगोली अर गाणां-वाळा कोयी कार्यक्रम कोनी छोडै। थावर, दीतवार नै फिल्म ई देखै।
दिनेस इब कॉलिज मोटर-सायकल पर जावै। अेक दिन बो दादै नै मोटर-सायकल पर लारै बिठा`र स्हैर जाय`र बिणां री आंख्यां 'चैक` करवा`र ल्यायो तो दादो न्ह्याल होग्यो। पोतै री बडाई करतो कोनी थकै। दिनेस रो खरच ई बधग्यो। कठै तो दो-तीन सौ रिपियां सूं म्हीनै भर रो काम चला लेंवतो अर कठै इब हजार रिपिया लाग जावै।गुमान करज रै पेटै टेक्टर ले तो लियो पण इब रात-दिन आठूं पो`र सोंवता-जागतां अेक ई बात दीसै। करजो कीकर उतरैला। तीस-तीस हजार री दो किस्तां साल मांय चुकावणी पड़ैली जद जाय`र आठ बरसां मांय चुकतो हुवैलो। बैंक वाळा तो सगळो ब्याज लगाय`र सो`ळा किस्तां बणा दी। कोयी किस्त चूकग्यो तो ब्याज पर ब्याज। दो-तीन लगोलग नीं भरीजी तो जुरमानो और लागसी। नीं भरी जावै तो कुड़की। बैंक तो आपरा पइसा वसूल करैलो ई। किरसै रै तो फगत खेती री कमायी है। खेती रो पक्को भरोसो कद हुवै? कदे काळ पड़ज्या तो कदे पाळो मारज्या। कदे ओळा कदे कीड़ा-मकौड़ा। किरसै रा तो सौ दुसमण। पण इब जद चिड़्यां खेत चुगगी तो पिछतावणै सूं कांईंंंंंंंंं लाभ? दो`रो-सो`रो करजो तो भर्यां ई सरसी।
गुमानै जद पैलै दिन टेक्टर लेय`र खेत मांय पाड़ करण तांईं गयो तो च्यार-पांच घण्टां मांय सगळो खेत उळट दियो। पण दो-ढाई सौ रिपियां रो तेल ई बळग्यो। ऊंट सूं जद पाड़ करतो तो फगत बखत ई लागतो और कोयी खरचो कोनी हो। किरसै नै सरीर री मिणत री ई बचत हुवै। जद सूं किरसो मिणत सूं बचणै री आफळ करण लागग्यो तो खेती रा खरचा बधग्या। गुमानै लोन रै साथै-साथै 'बैंक लिमिट` बणवाय ली इण कारण तेल रै पइसां री चिंत्या तो कोनी ही पण है तो ओ ई करज। जरूरत पड़ै जद किरसो बैंक सूं पइसा ले सकै पण ब्याज ई भरणो पड़ै। पांच-छ: सौ रो तेल तो दिनेस मोटर-सायकल मांय बाळद्यै। मोटर-सायकल कांईंंंंंंंंं आग्यो इब तो मूतण जावै तो चढ़`र। टींगर कीं सोचै ई कोनी। खरच घणो बधग्यो। बाबो सांची कैवै हो सोड़ सारू पग पसारो। म्हैं बिणां री बात कोनी मानी। टेक्टर, मोटर-सायकल, फ्रीज आयां पछै कम सूं कम डेढ़-दो हजार रिपिया म्हीनै रो खरच बधग्यो। इतरै खरच री पार कीकर पड़सी? बिण किरायै पर टेक्टर चलावणै री कोसिस ई करी पण म्हीनै री हजार-बा`रा सौ सूं घणी आमदणी कोनी होयी। गांव मांय और ई टेक्टर है। कैयी लोग तो टेक्टर लेय` स्हैर चल्या गया बठै भाड़ो कमावै पण गुमानो इतरी टाबरी नै लेय`र कठै जावै?
''चकवी! चिन्ता अर चिता बरोबर हुवै। चिता तो मरेड़ै नै बाळै पण चिन्ता तो जींवतै मिनख नै ई बाळद्यै। चणै नै जियां घुण मांय सूं खाय`र थोथो कर देवै बियां ई चिन्ता मिनख नै खा जावै। मिनख री सबसूं बडी बीमारी है- चिन्ता। फसल तो हुवैली जद हुवैली पण गुमान नै बिण री चिन्ता पैलां ई खावण लागगी।``
''चिन्ता री तो आप भली कैयी चकवा! इण दुनियां मांय मिनखा जूणी नै सब सूं घणी चिन्ता करणी पड़ै। जिण रै जितरो बेसी पसारो उतरी बेसी चिन्ता। जिकै रै घणो लगड़पेच नीं हुवै बो ई इण धरा पर सुखी है। गाय ना बाछी, नींद आवै आछी। अेक कवि रै कैवणै मुजब तो धरती पर फगत कबूतर ई सुखी है-
पटु पांखै भख कांकरे, सपर परेई संग।
सुखी परेवा पुहुमी में, अेकै तू ही विहंग।।``
''हां, थे सांच कैयी है चकवी! थे बात नै गुणी है। पण मिनख रै पटपड़ी मांय पड़बो करै फेर ई कोनी समझै। चिन्ता करणै सूं बिण नै कीं मिलै कोनी पण आ बिण री फितरत है। गुमानो हिसाब-किताब लगाय`र देख्यो तो बिण रै समझ मांय आयी कै बिण नै आठ बरसां मांय घणो ब्याज चुकाणो पड़सी। जे बिचाळै कोयी किस्त नीं भरीजी तो जुरमानो ऊपर सूं। बो टेक्टर सूं म्हीनै रा छ:-सात हजार रिपिया कमावै जद ई पार पड़ैली। रैयी बात खेती री तो बिण रो पूरो विस्वास कोनी कर्यो जा सकै। गुमान दोघाचिन्ती मांय फंसग्यो। कांईंंंंंंंंं करै? आमदणी बधावणै रा साधन कोनी दीसै। कांईंंंंंंंंं होसी? खांवती-पींवती डूमणी, घर मांय घाल्यो घोड़ो! चोखो टेक्टर लियो!``
गुमानै रै आ` बात तो हियै मांय ढुकगी कै बिण नै करज उतारणै तांईं माटी मांय रळणो पड़सी। इण कारण बिण टेक्टर रै साथै दूजी खेती उपकरण ई खरीद लिया। रात-दिन कदेई किणी रो काम हुवै बो आळस कोनी करतो। आड़ोसी-पाड़ोसी नै काम रो बूझतो रैंवतो। इण सूं बिण नै दो-ढाई हजार रिपिया म्हीनै री कमाई होवण लागगी, जिण सूं ऊपरला खरचा चाल जांवता।
इबकाळै बिण री मिणत कीं रंग दिखायो। नरमो, कपास लारलै बरस सूं बेसी हुया। ग्वार ई चोखो होग्यो। इण कारण बिण सोरायी सूं किस्त भर दी। बैंक लिमिट सूं लियोड़ो करजो ई चुकतो कर दियो। कीं सोरायी री सांस तो आयी पण आगला छ: म्हीना तो निकळता ई दीख्या। आगली किस्त चुकावणै रो बखत आग्यो। बिण नै अेक किस्त मई अर दूजी नवम्बर म्हीनै मांय चुकावणी होंवती। बिण नै इंयां खटतां देख`र अेक दिन दु:खी होय`र बाबै कैय दियो, ''गुमाना! तूं दिन देखै नीं रात! छियां देखै नीं तावड़ियो! बस लाग्यो ई रैवै।`` इण बखत गुमानो किणी रो माल मंडी मांय पूगा`र आयो हो अर आंवतां ई पाड़ोसी खेत मांय पाड़ करणै रो कैय दियो तो गुमानो बिना चा`-पाणी पियां ई टेक्टर रै हळ जोड़`र जावणै री त्यारी करै हो। बाबै री बात सुण`र हांस`र पड़ूत्तर दियो, ''बाबा! जद ढोल गळै मांय घाल ई लियो तो रोय`र बजावो चायै हांस`र, बजाणो तो पड़ैला! फेर क्यूं नीं हांस`र ई बजाल्यां। दो बरस तो गया। आगै ई ठीक होसी। इब म्हनैंंं विस्वास होग्यो। इण कारण लाग्यो रैवूं। इतरो तो आप जाणो ई हो थारा दोनूं पोता कॉलिज मांय भणै। दोनूं छोरियां ई दसवीं-बा`रवीं मांय भणै। खरचा कितरा बधग्या। नीं करूंला तो पार कीकर पड़ैली?`` बाबै सुण्यो अर ठंडी सांस खींच`र रैयग्या। गुमानो टेक्टर रै हळ जोड़ खेतां कानी चाल पड़्यो।
ठेकै कै हिस्सै पर जमीन लेवण वाळा अर देवण वाळा बैसाखी रै दिन सौदो पक्को करै। गुमानै रो खेत पाड़ोसी हीरो आपरी पांच बीघा जमीन ठेकै पर देवणी चावै हो। गुमानै बिण नै तीन हजार रिपिया बीघै रै हिसाब सूं पन्दरा हजार दे दिया। हीरो तो तीन बरसां तांईं ठेकै देवणो चावै हो पण गुमानो बोल्यो, ''आगै री आगै देखसां!`` गुमानै री सोच ही कै बिण रै खातै मांय अेक किस्त रा पइसा अगाऊ होवणा चायजै। इण कारण बिण खेती बधावणै री तेवड़ी ही। आछा उन्नत किस्म रा बीज लेय`र बिण पांचूं बीघा मांय नरमो बीज दियो। खूब खाद-पाणी दियो। नरमो ई खूब बध्यो। पण कैयो है- थारै मन कीं और है, दाता रै कीं और। इबकाळै फसल घणी आछी होयी पण गुमान री बडोड़ी भैण, बेटी रो ब्याव थरप दियो। बा भात न्यूंतणै तांईं आयी तो गुमानै रो माथो ठणक्यो। मायरो तो भरणो पड़सी। बाबै, मां अर जोड़ायत सूं सलाह-सूंत हुयी। कम सूं कम लाख रिपिया मायरै मांय लगावणै री जुगत बिठाणी पड़ैली। अैड़ै मौकां पर तो पइसा खरच करणा ई पड़ै। गुमानो सोचै तो हो तीन-च्यार किस्त साथै जमा करवाणै री पण अेक किस्त ई मुस्कल सूं भरीजी। मायरै सूं अळगा सगळां रा गाभा, किरायो कर`र बीस-पच्चीस हजार और ऊपर सूं लागग्या। दस हजार रिपिया करज सिर होग्यो।
हाड़ी री फसल बखत गुमान दस बीघा मांय कणक अर दस बीघा मांय ई सरसूं बीज दी। दिसम्बर मांय कीं 'छांटा-छिड़को` हुयो तो तारोमीरो बीज दियो। फसल तो ठीक ही पण पाणी री कीं कमी है। नहर मांय बंदी आयगी। इण कारण चौधरी रामकरण रै ट्यूबैल सूं पाणी मोल लेय`र लगावणो पड़्यो। इबकाळै कीं कीड़ा-मकौड़ा ई घणां होग्या तो कीटनाशकां रो छिड़काव करणो पड़्यो। इण मांय बीस-पच्चीस हजार रिपिया रो खरचो होग्यो। बिण मन मांय हिसाब लगायो कै इबकाळै डेढ़ लाख रै लगैटगै फसल हुवै तद पार पड़ै। जद ई किस्त चुकैली अर दूसरा करजा ई। देखो भगवान देवैलो। किरसै नै तो फगत भगवान री ई आस हुवै। जे बो रूस जावै तो दूजो कांईंंंंंंंंं कर सकै? इबकाळै जमानो ठीक-ठाक दीसै है। खेतां मांय फसल कोनी पाकै किरसां रा सुपनां पाकै। कोयी ब्याव रा सुपना देखै, कोयी मुकलावै रा। हाड़ी अर सावणी री फसलां बेच्यां पछै अै दो मौका हुवै जद किरसै कनै नगदी बापरै। इण कारण घर, परिवार रा सगळा लोग फसल री आस लगायां राखै।
होळी रा दस-बा`रा दिन बाकी हा। किरसा आपरै मोद मांय मस्त हा। सरसूं पांच-सात दिनां मांय पाक`र त्यार हो जावैली। घर मांय कोयी नुंवै गाभा री मांग करै कै और चीज री फरमाईस करै तो जवाब मिलै- 'बस पांच-सात दिन थम जावो। सरसूं बेच`र ल्या देसां।` पण जिकी बात रो डर हुवै बा तो होयां सरै। अेक दिन चाणचक्क घटावां उमड़ी। बादळ गड़गड़ाया अर बिजळियां कड़कण लागी। किरसै रै हियै पर नस्तर-सा चालण लाग्या। अेकदम बादळ ओसरग्या पण पाणी नीं पाथर बरस्या। पैली चणै री दाळ सिरखा फेर बडा और बडा। दो-दो, ढाई सौ ग्राम रा ओळा। धरती धोळी होयगी। किरसां रै उणियारै रा सगळा रंग पुंछग्या। इब अेक ई रंग हो- फगत धोळो। पण धोळो होंवतां थकां ई किरसां री जिनगाणियां पर बण काळस पोत दी। बिण रात गुमानो इसो बीमार पड़्यो कै पन्दरा दिनां सूं ठीक हुयो।
ओळां रो असर लम्बै-चवड़ै खेतर मांय हो। घणो नुक्सान हुयो। किरसां री कड़तू टूटगी। बिच्यारा लुटग्या। इण कारण विधानसभा मांय सवाल उठ्या। सवालां रा जवाब आया। हलका पटवारियां अर तहसीलदारां सूं कलक्टर रै मारफत रपट मांगीजी। साठ प्रतिसत खराबो मान`र मुआवजो तै हुयो। बिण बरस लगान माफ कर्यो गयो। बीजळी रा बिल आधा कर दिया। बैंकां आपरी किस्तां छ: म्हीना आगै सरका दी। इण मांय ई पटवारियां अर दूजै अफसरां आछा हाथ रंग्या। मोटै अर चालू कास्तकारां बेसी फसल दिखा`र दोनूं हाथां सूं रकम बणायी। इण लोगां रै अेक साथै दो-दो फसलां पाकी। मार्या गया तो छोटा अर बिचोटियै दरजै रा किरसा। किण नै जाय`र दुखड़ो सुणावै। राम रै मारेड़ां नै कुण झालै?
गुमान इब घर मांय अेकलो गुमसुम-सो बैठ्यो रैवै। कोयी दो बर बूलावै तो अेकर बोलै। गुमानो बियां तो मुआवजै री रकम सूं घणकरै लेणदारां नै सुळटा दिया हा पण फसल खराब होवणै रो बिण रै गै`रो सदमो लाग्यो हो। कोयी टेक्टर किरायै लेवण आवै तो बोलबालो साथै होयलै। बिण रै मन मांय कांईंंंंंंंंं उथळ-पुथळ है बो किणी नै कोनी बतावै। अेक दिन बिण नै बाबै समझावणै री कोसिस ई करी। कैयो, ''बेटा! मन छोटो नां कर। परमात्मा दिखावै बै रंग तो देखणा ई पड़सी। किरसो तो पूरी भांत कुदरत रै आसरै रैवै। किरसै रै तो कदे घी घणां, कदे मुट्ठी चणा। इंयां ई चालतो रैवै। तूं फिकर ना करै। इंयां ई रांडां रोंवती रैसी अर इंयां ई जंवाई जीमता रैसी। करजो ई उतर जासी। तूं बात मन रै नां लगा। किणी आदमी कोयी ऊंच-नीच करी हुवै तो बदळो ई लियो जा सकै पण कुदरत रो कांईंंंंंंंंं करां? थे अेकला तो कोनी! सगळां साथै होयी है आ तो! सबर कर।`` पण गुमानै रै कीं हियै कोनी ढूकी।
आसाढ़ लागतां ई किरसा आभै कानी ताकण लाग जावै। इब बरसै! इब बरसै! इण मुजब अणगिणत कैबत बणियोड़ी हैं। सुगनी लोग सुगन देख`र काळ कै जमानै मुजब बताया करता। बिणां रै कैयां मुजब लोग काम करता। बरसणो कै नीं बरसणो तो आज ई कुदरत रै हाथ मांय है पण इब सुगनी कोनी रैया कै लोगां री बिण मांय आस्था कोनी रैयी। पैली लोग कुदरत रै घणां नेड़ै रैंवता इण कारण बै कुदरत री छोटी सूं छोटी हलचल अर बदळाव नै पिछाण लैंवता। इबै बै बातां कोनी रैयी।
घटावां आवै अर ऊपर सूं निकळज्यै। बरसै कोनी। गांव-गांव मांय लोग इन्दर देवता नै खुस करणै तांईं जिग रचावण लागग्या पण कैयो है नीं जिण री मां मरै, मौसी ई मरज्यै। साढ़ सूको गयो। सावण ई कोनी फूट्यो। सावण तीज नै सुगन री च्यार छांटां तो पड़ी पण भभाका मारती धरा रै इण बूंदां सूं कांईंंंंंंंंं फरक पड़णो हो। भड़तपो घणो होग्यो। जिकां रै ट्यूबैल हा कै जमीन मांय नहरी पाणी लागतो बिणां तो कीं नरमो कपास, ग्वार, कै पसुवां तांई चारो बीज दियो। बिरानी जमीन वाळा तो हळ पर हाथ ई कोनी धर्यो। पाणी नै लेय`र जद सूबां मांय आपसी खींचताण होवण लागगी तो खेती-बाड़ी तांईं पाणी कठै हो? सिरकार तो पीवणै रै पाणी री पार पाड़द्यै तो ई घणो चोखो।
कमोबेस हालात सगळां रा अेक सा ई हा। जिकां रै घणी जोत ही बिणां तो सिंचाई कर थोड़ी-घणी कीं फसल बीज दी। बाकी बिरानी अर थोड़ी जमीन वाळा कठै ई स्हैर सारू दिहाड़ी-मजूरी तांईं जावणै लागग्या। तीस बीघा जमीन रै धणी गुमानै नै सिंचाई री कमी रै कारण पांच बीघा मांय खेती कर संतोख करणो पड़्यो। तीन बीघा मांय नरमो कपास, अेक बीघा मांय बाजरी अर अेक बीघा मांय पसुवां तांईं चारो। बिण नै हर बखत किस्तां चुकावणै री चिन्ता सतांवती रैंवती; ऊपर सूं घर-गिरस्ती अर टाबरां री भणाई रा खरच! बीं दिन दोपारै सगळा बैठक मांय ई हा। गुमानो, गुमानै रा मां-बाप, दोनूं छोरियां सगळा टीवी सामीं बैठ्या हा। समाचार सरु होग्या तद बडोड़ी छोरी टीवी बंद कर दियो अर किताब उठा`र दूजै कमरै कानी चाल पड़ी। छोटी ई बिण रै लारै-लारै चाल पड़ी। इतरै मांय दिनेस अर राकेस ई कॉलिज सूं आयग्या। मोटर-सायकल बरींडै मांय थाम`र बैठक मांय आग्या। गुमानै री जोड़ायत रसोई कानी चा` बणावण चाल पड़ी।
राजेस इबकाळै ई कॉलिज मांय दाखिलो लियो है। आछी कद-काठी रो जुवान अर क्रिकेट रो खिलाड़ी है। दादै रै मूंडै लागतो। इण कारण आंवतां ई दादै नै बतावण लाग्यो, ''दादा! म्हैं कॉलिज री क्रिकेट टीम मांय चुण लियो गयो। इब म्हे खेलणै तांईं दूजै सूबै मांय जासां।``
''बेटा! तूं कीं भणै ई है कै सगळै दिन क्रिकेट खेलता रैवै? अेकलै खेलणै सूं पार पड़ जावैली कांईंंंंंंंंं?`` दादै पोतै नै बूझ्यो।
''दादा! बै बातां इब पुराणी होगी जद लोग कैंवता- 'पढ़ोगे, लिखोगे बनोगे नवाब। खेलोगे, कूदोगे होवोगे खराब।` आज आछा खिलाड़ी तो चांदी कूटै। आछै खिलाड़ियां नै बडी-बडी कंपनियां चाल`र नौकरी देवै।``
''चालो, तूं कैवै तो ठीक ई हुवैलो!`` दादै हामळ भरी।
''हां, दादा! म्हनैंं तीन हजार रिपिया 'किट` तांईं चायजै। तीन हजार रिपिया तो म्हे देसां बाकी कॉलिज देवैलो।``
''तीन..... हजार...... !`` दादै जोर देय`र बूझ्यो।
''हां, दादा! म्हैं जे तीन हजार रिपिया जमा नीं करवाया तो घणां ई त्यार बैठ्या है।`` राजेस उथळो दियो।
''पण तीन हजार कठै सूं ल्यासां?`` इबकाळै गुमानै मून तोड़्यो।
''पइसो तो ज्हैर खावण नै कोनी! थांनैं सूझै क्रिकेट खेलणी! घरां कोनी अखत रो बीज अर रांड धोकै आखा तीज। पूरण मिस्त्री सूं दो म्हीना पैली डरामी (फसल काढ़णै री मसीन) बणवायी। बिण दस बर टोक दियो। बिण नै देवण तांईं किणी सूं पकड़-धकड़`र अै पांच हजार रिपिया ल्यायो हूं। पूरण ई तो गरीब आदमी है। कितरी`क उधार करै?``
''तो म्हैं कांईंंंंंंंंं करूं? जद कीं बणणै रो, कर दिखावणै रो मौको आवै तो आप बहीखाता खोल`र दिखावण लाग ज्यावो!`` इतरो कैय`र बो पग पटक खड़्यो हुयो अर रसोई कानी चाल पड़्यो।
''अठै कमांवतां रा हाडका सुळग्या। इणां रै कीं फरक ई कोनी पड़ै! क्रिकेट खेलैगा अै। तेल नीं ताई, रांड मरै गुलगुलांई। म्हनैंं आंख्यां दिखावै!`` इतरो कैय`र गुमानै पचास री गड्डी आंगणै मांय चलाय`र मारी अर तैस मांय आय`र बोल्यो, ''और चायजै तो का`ल म्हारा हाडका बेच`र ले आयी।`` कैय`र बो झटकै सूं उठ्यो अर अलमारी रो ताळो खोल`र कीटनाशक री बोतल रो ढक्कणियो हटा`र मूंडै कानी करण लाग्यो। जद ई दिनेस जोर सूं धक्को दियो अर चिरळी मे`ली, ''माऊ! भाज`र आ। बाबो 'स्प्रे` पीवै।`` कीटनाशक री बोतल दूर जा पड़ी अर कमरै मांय तेज जहरीली बदबू पसरगी। दिनेस, गुमानै रो हाथ खींच बैठक सूं बारै ले आयो। सगळा बारै आग्या।
इनै हेलो सुण`र गुमानै री जोड़ायत अेकदम घबरागी। चा` री देगची हाथां सूं छूट`र पगां पर पड़गी। 'बळगी रै!` कैय`र जोर सूं चिरळी मे`ली। दोनूं छोरियां पगां नै ठंडै पाणी मांय डबो दिया। गुमानो कीं ठीक हुयो तो माथो पकड़`र बैठग्यो। राजेस खुद नै कसूरवार समझ आंख्यां आगै हाथ दियां रोयां जावै हो। गुमानै री मां तो सैं`तरी-बैं`तरी होगी। बिण री तो आ समझ मांय ई कोनी आयो कै ओ चाणचक्क कांईंंंंंंंंं हुयो। गुमानै रो बाप उठ्यो अर राजेस नै छाती रै लगा`र बोल्यो, ''चुप होज्या बेटा! जुवान बेटा रोया कोनी करै। थारो कीं कसूर कोनी!``
दादै रो स्हारो मिलतां ई राजेस जोर-जोर सूं सुबकण लागग्यो। बिण री हिचकियां बधगी। रोंवतो-रोंवतो बोल्यो, ''दादा! गळती होगी! म्हैं कीं कोनी मांगूं। म्हैं बाबै सूं ई माफी मांग लेसूं। अै कीं ना करै।``
''सो-कीं ठीक हो जासी।`` कैय`र दादो बोल्यो, ''ओ गुमाना! उठ। ओ दिन नीं देखणो पड़ै इण कारण म्हैं थांनैं कैयो सोड़ सारू पग पसारो। म्हनैंं चालणी रा बेझ पैलां ई दीसै हा। इब अैड़ा तेन्दर कर क्यूं म्हारै धोळां मांय धूड़ गेरै। तूं अपघात कर लेवैला तो दुनियां मांय परळै कोनी आ जावैली पण इण टाबरां माथै कलंक रो टीको लगा जावैलो। बैंक तो थारी जमीन बेच`र करजो उगाह लेसी। थारै मरणै सूं करज माफ कोनी हुवै। करम तो तूं कर्या अर भुगतणा पड़सी थारी औलाद नै। कीं तो सरम कर! लोग बेटै री आस इण कारण करै कै बिण रै कांधां पर चढ़`र आपरी आखरी जातरा पूरी करै पण तूं तो करादी! जे दिनेस नीं पकड़तो तो तूं तो म्हारी नाक घुरड़`र बाढ़ई दी। वा` रे बेटा! वा`! आछो नांव उजाळ्यो म्हारो?``
सुण`र गुमानो खड़्यो हुयो अर बाप रा पग पकड़`र बोल्यो, ''बाबा! गळती होगी। माफ करद्यो। म्हारी आंख्यां खुलगी। म्हैं दबाव मांय आग्यो हो।``
''जिनगाणी सूं बडो कोयी दबाव कोनी हुवै। आछी बात है इबै ई संभळग्यो तो। किरसै री जूण ई अेक तप है। घाटो-नफो तो चालतो रैवै। भीड़ भाठै सूं काठी हुवै पण जिनगाणी इतरी सस्ती कोनी! इब खड़्यो हो चौधरी रामकरण कनै चालां। बो ई आपणी पांच बीघा जमीन खरीद सकै। बिण पइसां सूं करज ई देयी अर छोरियां रै ब्याव तांईं कीं बैंक मांय जमा करवा देयी। बाकी सूं टाबरां री भणाई-लिखाई करवायी। फेर जमानो लागैलो जद पांच री दस बीघा जमीन खरीद लेयी। तूं करै इण भांत कुणबो कोनी बसै!``
''तो चकवी! अठै कहाणी नुंवों मोड़ ले सकै ही। गुमानो जे कीटनाशक पी लेंवतो तो कीं ई हो सकै हो पण बिण रै परिवार री किस्मत चोखी ही। गांव मांय और लोगां ई करज ले राख्यो है। सगळां री हालत खस्ता है। बेरो नीं कद कोयी कांईंंंंंंंंं कर लेवै? इण कारण म्हैं थांनैं पुराणै जमानै री बातां बतावै हो, नुंवों जमानो तो तूं देखै ई है!``
''हां! थे तो सांची-सांच कैय दी पण बो पी लेंवतो तो?``
''घणो सोचणो नीं चायजै!`` कैय`र चकवो पसवाड़ो मार सोयग्यो अर थोड़ी ताळ पछै खराटा सुणीजै हा।